भारतीय संस्कृति का प्रहरी - छत्रपति शिवाजी -
2 जून को जिनका राज तिलक हुआ था। 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह औरंगजेब के क्रूर अत्याचार से सारा देश परिचित है, हिन्दु धर्म के साधु महात्मा और ब्राह्मणों पर अत्याचार करने की तो क्या बात उसने अपनी सभी भाईयों की हत्या कर दी, अपने पिता शाहजाहाँ को जेल में डालकर पानी के लिए भी तड़पा दिया।
ऐसे क्रूर औरंगजेब का मान मर्दन करने वाले थे छत्रपति शिवाजी। शिवाजी ने औरंगजेब को नाको चना चबा दिया। उसके कई प्रमुख सेनापतियों को मार दिया, परन्तु छत्रपति शिवाजी औरंगजेब बादशाह के वंश में नहीं आया, तब औरंगजेब ने जयपुर के महाराज को शिवाजी को वश में करने के लिए भेजा परन्तु शिवाजी ने आने हिन्दु राजा से युद्ध करना उचित नहीं समझा अतः जयपूर के महाराज के अनुसार औरंगजेब के पास संधि करने दिल्ली आ गया। औरंगजेब ने शिवाजी का अपमान किया तथा नजरबंद कर दिया। तब भी शिवाजी औरंगजेब की आँखों में धूल झोककर वापिस महाराष्ट्र चला गया।
ऐसे वीर नीतिज्ञ बुद्धिमान छत्रपति शिवाजी का राज तिलक 2 जून सन् 1640 को हुआ था। परन्तु इस राज तिलक को महाराष्ट्र के ब्राह्मणों ने वर्षों तक अनुमति नहीं दी। अन्त में काशी की पण्डित सभी के प्रधान पं. गांगभट्ट यह समझाने बुझाने पर शिवाजी को यज्ञोपवीत दिया गया यज्ञोपवीत मिलने पर 2 जून को उस वीर का राजतिलक हो गया। उस समय यज्ञोपवीत लेने के लिए छत्रपति शिवाजी ने कोटि रु दान दक्षिणा में खर्च किया था। पाठक गण अनुमान लगाए आज से 4-5 सौ वर्ष पहले रु. का कितने मूल्य या। परन्तु इतना रु. खर्च करने पर भी हमारे देश के ब्राह्मणों ने शिवाजी को आजीवन वेदमन्त्र नहीं सुनाया। जिस शिवाजी को आजीवन वेदमन्त्र नहीं सुनाया। जिस शिवाजी का गो ब्राह्मण की रक्षा करना ही व्रत था। उस वीरवर को भी कट्टर पंथी ब्राह्मणों ने वेद मंत्र नहीं सुनाया। यह तो युग निर्माता ऋषि दयानन्द का ही साहस था जिसने अनेक बार विष पान करके मानव-मात्र के लिए वेद पढने का अधिकार दिला दिया। ऋषिवर तुझे कोटि-कोटि प्रमाण।
Chhatrapati Shivaji was the one who humiliated such a cruel Aurangzeb. Shivaji gave Aurangzeb a tough time, killing many of his chief generals. However, Chhatrapati Shivaji was not a descendant of Emperor Aurangzeb. Aurangzeb then sent the Maharaja of Jaipur to subdue Shivaji, but Shivaji did not consider it appropriate to wage war against a Hindu king. Therefore, according to the Maharaja of Jaipur, he came to Delhi to negotiate a treaty with Aurangzeb. Aurangzeb insulted Shivaji and placed him under house arrest. Even then, Shivaji deceived Aurangzeb and returned to Maharashtra.
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